भजन

तेरे डमरू की धुन सुनके मैं काशी नगरी आई हूँ

तेरे डमरू की धुन सुनके,

मैं काशी नगरी आई हूँ,

मेरे भोले ओ बम भोले,

मैं काशी नगरी आई हूँ।।

तर्ज – तेरी मुरली की धुन सुनने।

सुना है हमने ओ भोले,

तेरी काशी में मुक्ति है,

उसी मुक्ति को पाने को,

मैं काशी नगरी आई हूँ,

मेरे भोले ओ बम भोले,

मैं काशी नगरी आई हूँ।।

सुना है हमने ओ भोले,

तेरी काशी में गंगा है,

उसी गंगा में नहाने को,

मैं काशी नगरी आई हूँ,

मेरे भोले ओ बम भोले,

मैं काशी नगरी आई हूँ।।

सुना है हमने ओ भोले,

तेरी काशी में मंदिर है,

उसी मन्दिर में पूजा को,

मैं काशी नगरी आई हूँ,

मेरे भोले ओ बम भोले,

मैं काशी नगरी आई हूँ।।

सुना है हमने ओ भोले,

तेरी काशी में भक्ति है,

उसी भक्ति को पाने को,

मैं काशी नगरी आई हूँ,

मेरे भोले ओ बम भोले,

मैं काशी नगरी आई हूँ।।

तेरे डमरू की धुन सुनके,

मैं काशी नगरी आई हूँ,

मेरे भोले ओ बम भोले,

मैं काशी नगरी आई हूँ।।

गायक – प. प्रदीप जी मिश्रा।